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G.M.Dagliya's Interview

This interview was first published in "Prathkal" a leading daily newspaper from Mumbai and "Shatabdi Gaurav-Fortnightly".

G.M. Dagliya बीमा के क्लेम दिलवाने में प्रख्यात गणपत डागलिया आज अपने बीमा व्यवसाय के २५ वर्ष पूर्ण कर रहे हैं। इतने अंतराल तक इस क्षेत्र में हर वर्ष नई ऊंचाईयों को पाने वाले इस सरल स्वभाव के व्यक्ति को आज समाज भी अपने कंधों पर बैठाना चाहता है। इनके कार्यों के कारण आज राजस्थान का नाम बीमा व्यवसाय में एक अलग ऊंचाई पा चुका है। वर्तमान में भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी के लगभग १० लाख अभिकर्ता हैं। एलआईसी के इन्हीं १० लाख एजेंटों में रचे बसे राजस्थानी तेरापंथ जैन समाज के गणपत डागलिया ने अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में कई बार एलआईसी/जीआईसी में दर्ज करवाया है। मुंबई की हृदय स्थली कालबादेवी जवेरी बाजार, मुंबा देवी क्षेत्र में पिछले पच्चीस वर्षो से एलआईसी/जीआईसी का परचम फहराने पाले गणपत डागलिया को बीमा कंपनी ने एमडीआरटी, शतकवीर करोडपति, मेवाड बीमारत्न, १९८६-स्वर्ण पदक, १९८७ गोल्ड मेडल चेअरमैन, एमडीआरटी लगातार ५ बार चेयरमैन क्लब सदस्यता १९९३, १९९५ शार्टड करोड़पति अवार्ड, २००१- जीवनश्री क्लब अवार्ड, २००५ बेस्ट ब्रांड सर्विस अभिकर्ता अवार्ड, २००६- मल्टीपल करोड़पति, शतकवीर करोड़पति अवार्ड तथा स्वर्णरत्न जैसे कई अवार्डों से नवाजा है। जैन तेरापंथ में एकमात्र नाम है गणपत डागलिया जिसने सभी से ज्यादा बीमाधन व उसके बाद क्लेम भी सही समय पर लोगों को दिलवाया है। एक क्लेम तो उन्होंने मात्र आधे घंटे में ही दिलवाया था सही समय पर क्लेम दिलवाना यह गणपत डागलिया की खासियत है। प्रस्तुत है उनसे मुलाकात के कुछ अंश :

आपने सोने चांदी के व्यापार में रहते हुए भी वीमा व्यवसाय को क्यों अपनाया?
उस समय जब मैं एलआईसी एजेंट बना तब बीमा बेचना बड़ा कठिन काम था और मुझे मेरे बड़े भाई किशनजी डागलिया व स्व. पिताजी मोहनलालजी डागलिया ने कुछ नया व जिसमें चुनौती हो करने को कहा। मुझे भी लोगों के पास जाना व कुछ चुनौती लेकर काम करना ही अच्छा लगता है। फिर इस व्यवसाय में लोगों के पास जाने का उनसे सिखने का व उनके दुःख दर्द में शामिल होने का मौका मिलता था इसलिए मैं इस व्यवसाय में आया और उसे दिल से अपनाया। आफ पास इस समय कितने लोगों का व कैसे लोगों का बीमा है? इस समय लगभग पांच हजार से ज्यादा व्यापारियों का बीमा मेरे पास है, इनमें समाज के सबसे बड़े घरानों का बीमा करने में मुझे महारथ हासिल है। साथ ही कम आय वालों का भी मेरे ऊपर हमेशा प्रेम बना रहा है, आज करोड़ाें रुपयों का प्रिमियम हर महीने बीमा कंपनियों को मेरे ग्राहक देते हैं।

आप इतनी ऊंचाई तक कैसे पहुंचे?
जीवन बीमा एलआईसी में हर बड़े व अच्छे कार्य करने वाले एजेंट को हर वर्ष सम्मानित किया जाता है। सभी व्यापारियों व मेरे समाज के सहयोग व मेरे घर के, परिवार के बड़ाें के आशीर्वाद के कारण आज इस ऊंचाई पर हूं। मेरी इस उपलब्धि में हमारे गुरु आचार्य महाप्रज्ञजी के सफलता के पांच सूत्र
१. सहन करो
२. सेवा करो
३. श्रम करो
४. संयम करो
५. स्वभाव बदलो व सफल बनो को ध्यान में रखकर कार्य करने का ही फल है।

आप ग्राहकों को बीमा देते समय किन बातों का ध्यान रखते हैं?
मेरे लिए मेरा ग्राहक भगवान का स्वरूप है, उसके लिए कम किमत में ज्यादा जोखिम, ज्यादा वापसी व सही समय पर उसे पैसा वापस दिलवा दूं यही ध्यान में रखता हूं। आप जीआईसी, सोने-चांदी दुकानों का व मेडिक्लेम बीमा क्षेत्र में क्यों आये? मैंने देखा कि एलआईसी में मैं सभी को सही समय पर पैसा व सुरक्षा दे रहा था पर ज्वेलरी ब्लॉक, व ज्वेलरी के काम में लोगों को चोरी, डकैती, लूट व आगजनी के बाद कोई सुरक्षा नहीं थी। उस समय बड़े से बड़ा व्यापारी भी एजेंट की कम जानकारी के कारण भारी नुकसान से घबराता था, ऐसे में मुझे इस क्षेत्र में पूरी जानकारी के साथ आने की प्रेरणा मिली और इसी के कारण यहां हूं, आज मुझे संतोष है कि मेडिक्लेम व दुकानों के कई क्लैम मैने सही समय पर दिलवाए हैं।

आपको ज्यादा सहयोग किन-किन का मिला?
मुझे मेरे पिता स्व.मोहनलालजी डागलिया का व पिता स्वरूप बड़े भाई किशनजी डागलिया का सहयोग मिला है। वैसे देखा जाए तो समाज के हर व्यक्ति ने मुझे प्रेम दिया है, फिर चाहे वो किसी भी स्तर का व्यक्ति हो। आज हालात यह है कि हमारा समाज पहले मुझे अपने यहां सामने से बुलाता है, फिर बीमे की बात करता है। इतना प्रेम-स्नेह अन्य व्यापार में मुझे शायद ही मिलता।
राजस्थानी समाज बीमे में कम मानता है, फिर आप इतनी ऊंचाई तक कैसे पहुंचे?
यह बात बिल्कुल गलत है कि राजस्थानी समाज बीमे में कम मानता है, हमारा समाज ही मुझे लगता है बीमा ज्यादा करवाता है। इसके अगर आंकड़े निकाले जाएं तो सबसे ज्यादा व बड़ी पॉलिसी राजस्थानियों की ही मिलेगी, और मेरा ऊंचाई तक पहुंचने का कारण भी यही है।

आप कार्य करने का ढंग क्या है? आप एलआईसी के प्लॉन भी दूसरों से अलग रहते हैं?
मेरे कार्य करने का ढंग है पॉलिसी लेते समय ही सभी कुछ साफ-साफ ही कहे, कोई गलत जानकारी नहीं देता, व्यापारियों व बीमा कंपनी के मध्यस्त होने का रोल पूरी इमानदारी से निभाता हूं। इसीलिए सभी क्लेम दिलवाने में अभी तक सफल रहा हूं। मैं व्यापारी भी हूं मैं हर पहलू को जानता हूं कि रुपया भरे तो रिस्क-कवर भी ज्यादा मिले, रुपये का बोनस भी ज्यादा मिले और आजीवन रिस्क कवर भी हो वैसे तो एलआईसी के कई प्लान हैं, परंतु किसे कैसा प्लान देना ये हमारी रूबरू मुलाकात पर पार्टी को प्लान देते हैं जो चौबीस कैरेट सोने जैसा खरा उतरता है। आफ बाद ग्राहकों को सेवा कैसे देंगे? मेरी सेवा मेरे ऊपर निर्भर है ही नहीं खुद की ऑफिस, मेरे कर्मचारी, मेरी पत्नी मनोहरदेवी एवं मेरे पुत्र चिराग के भी इसी व्यवसाय में आने के कारण आगे भी मेरे ग्राहकों को सेवा समय पर मिलती रहेगी और फिर आज तो आधुनिक टेक्नॉलाजी के चलते भी यह समस्या ज्यादा नहीं है।

सही एजेंट को कैसे पहचानें?
व्यापारी भरोसा करते हैं भरोसे में एजेंट अपने फायदे के लिए कुछ भी कर देता है, परंतु सावधानी यह रखनी चाहिए कि वास्तविकता क्या है उसे समझे तो किसी भी पार्टी का नो क्लेम होगा ही नहीं। वर्तमान में व्यापारियों के लगभग पच्चास प्रतिशत क्लेम नहीं मिल रहे हैं, कारण उनकी पूरी जानकारी के बिना बीमा लिया है। यहां पर सबसे पहले एजेंट का पूर्व अनुभव व एलआईसी, जीआईसी में कितने वर्षों से व कौनसे क्लब में कार्यरत है यह जानकारी होना आवश्यक है।

व्यापारियों के लिए बीमा आवश्यक क्यों है?
आज व्यापार में हर रोज तनाव, हर तरफ लालच व दूसरे को ठगने की मानसिकता के चलते किसी भी समय परिवार व व्यापार को आर्थिक मंदी से नुकसान हो सकता है या फिर आफ व्यापार व आपको कोई अंजान व्यक्ति भी नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में सरकार द्वारा एलआईसी व जीआईसी की पॉलिसी के साथ रहकर मानसिक व आर्थिक नुकसान की भरपाई की जा सकती है, यही समझने की जरूरत है।

आपकी शाखाएं कहां कहां हैं?
मेरी कोई ब्रांच नहीं है, मैं आज नाइस इन्शुरेन्स लेंडमार्क के नाम से काम करता हूं, और सच पूछो तो आज गणपत डागलिया ही एकमात्र भरोसे का नाम है। मैं इसी नाम से काम करता हूं। २५ वर्षों में क्या खोया क्या पाया? २५ वर्षों में खोया कुछ भी नहीं है समाज का प्रेम, बीमे की रकम समय पर दिलवाने के कारण लोगों से मिली दुआ, व अपने ग्राहकों के परिवार में खुद को उनका ही हिस्सा बनाने में आज सफल रहा हूं। आज मेरे सारे ग्राहक मेरे परिवार के सदस्यों जैसे हैं, दुख व सुख में हम सभी साथ रहते हैं, यही सबसे बड़ी उपलब्धि है। दुकान के बीमे का क्लेम क्यों नहीं मिलता? दुकान के बीमे का क्लेम छोटी-छोटी गलतियों के कारण नहीं मिलता, दुकान बीमा लेने से पहले आप हर पहलू को जाने फिर लें, व्यापारी बहुत भरोसा करते हैं। बीमा किया चेक दिया फिर उन्हें पॉलिसी आती है वो उसे फाईल कर देते हैं, यह नहीं देखते की मैंने रिस्क कवर ली है या नहीं। मुझे ऐसे भी लोग के फोन आते हैं की मैं दस वर्ष से दुकान का बीमा भर रहा हूं, और मेरा क्लेम, नो क्लेम या रिजेक्ट कर दिया जाता है। उसका कारण यही है कि आप बीमा जब लेते हैं तभी हर पहलू को जाने ताकि भविष्य में कंपनी नहीं भी दे तो भी कोर्ट से लेने की ताकत रख सके बीमा उसी एजेंट से ले जो इस तकनीक को व इस विषय पर पूर्ण जानकारी रखता हो।

अभी तक कितने लोगों को आपने क्लेम दिलवाया है?
एलआईसी के २५ वर्षों में क्लेम जो समय अनुसार दिया ऐेसे कई नाम हैं उनमे प्रमुख हैं- भंवरलाल कोठारी (फोर्ट), मांगीलाल सियाल (समीचा), भीमाना नेरला (वाशीनाका), भुरालालजी सिघवी (गुडा), ताराचंद माली (फोर्ट), दिलीफमार ओसवाल(कोल्हापुर), राकेश प्यारचंद शिशोदिया (मुंबादेवी), पवन हरकलाल वडाला (गोवंडी), सोहनलाल कच्छारा (फोर्ट), भरतकुमार ओसवाल(कोल्हापुर), केशरीमल ओसवाल (कोल्हापुर), केशुलाल सांखला (मालाड), प्रकाशचंद्र बाफना (जोगेश्वरी), रुपचंद पालरेचा (ठाकुरद्वार), इन्दरमल सांखला (जवेरीबाजार), देवीसिह राजपूत (जवेरी बाजार), सोहनलाल चंपालालजी डागलिया (कुर्ला) रोशनलालजी ओसवाल (घाटकोपर), वख्तावरमल पामेचा (ठाकुरद्वार), छगनीबाई वख्तावरमलजी पामेचा (ठाकुरद्वार), गेहरीलाल कोठारी (सायन कोलीवाडा), भंवरलाल सियाल (समीचा) नानालालजी सिघवी (केलवा), मोतीलाल सियाल (जवेरी बाजार), हुलासीबाई रुपलालजी सांखला। दुकान बीमा क्लेम-इंटरगोल्ड (धनजी स्ट्रीट), अंबिका ज्वेलर्स (कोलीवाडा),प्यारचंदजी धाकड़(सायन), चांदीबाई धाकड (सायन), किशोर केशुलालजी (विक्रोली), रेखा सुभाष जैन (असल्फा), मनोज कुमार (गोवंडी), अर्जुनलाल कुकडा (गोवंडी), ख्यालीलाल नानालाल कोठारी (भिवंडी), मिनल पैलेस (धनजी स्ट्रीट), स्वस्तिक ज्वेलर्स (सांताक्रुझ)।

मेडिक्लेम में अस्पताल में बिना रुपया भरे क्लेम दिलवाने में आपको नाईस ब्रांड के नाम से जाना जाता है?
मेडिक्लेम में सबसे अच्छी कंपनी के द्वारा करता हूं, जिसका अभी तक १०० प्रतिशत क्लेम मैंने बिना रुपया भरे पास करवाये हैं, जैसे इन्द्रमलजी धाकड, बसन्तीबाई धाकड, भेरुलाल सोनी, किशन डागलिया, फतेहलाल कोठारी, संजय डिडवानीया, रमेश पामेचा (ठाकुरद्वार), देवेंद्र डागलिया, प्रेमसिह राजपूत, सुशिला मेघराज पालरेचा, भेरुलाल सोहनलाल राठौड व प्रकाश जोशी, ऐसे कई और भी नाम हैं इसीलिए नाईस बेस्ट ब्रांड से प्रख्यात है। हमने सुना है कि लोग आफ पास खुद पॉलिसी (बीमा) लेने के लिए आते हैं? यह बात सच है कि आज प्रेम वश लोग मेरे यहां खुद चले आते हैं। वैसे मेरे दफ्तर में मेरा पुत्र चिराग कम्प्युटर, लैपटापकी नई जानकारियों के साथ वहां हमेशा उपलब्ध रहता है। क्लेम प्राप्त करने वालों में साहेबलाल जैन (चेम्बुर), संदेश रोकडे (चेम्बुर), मंजुदेवी दिलीफमार संघवी, मंजुदेवी साहेबलाल, हेमंत मनोज जैन, स्वीटी मनोज जैन, महावीर डालचंद कोठारी, दिनेश मोतीलाल डागलिया, गोपाल मोतीलाल डागलिया, डालचंद कालुलाल डागलिया, पुष्पा पुखराज सियाल समीचा, शंकरलाल सी. चौहाण(धनजी स्ट्रीट), सुनिता गणपत बोरडिया, पारसमल जैन (ठाणे), वंदना प्रमोद मुणोत (मालाड), रमेश एम. हिरण (चेंबुर), किशन बाबुलाल कोठारी, रवि भंवरलाल पामेचा, प्रकाश बाबुलाल डांगी, अनीता संजय धाकड, शोभा एस. नाबेडिया, लादीवाला, लक्ष्मीलाल कालुलालजी डागलिया, पंकज शांतिलाल चेम्बूर, दिलखुश शांतीलाल (चेम्बुर), प्रकाश प्यारचंद सिशोदिया (मुंबादेवी), सुशील वडाला(ठाणे). मेरी सफलता यही है कि मुझे आज लोगों के पास कम ही जाना पड़ता है। इसके लिए मैं सभी ग्राहकों का, शुभचितकों का, समाज व परिवार का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।